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इमरान के बेटे का दावा-पाकिस्तान तानाशाही की ओर बढ़ रहा पिता के साथ जेल में बुरे बर्ताव का आरोप लगाया, कहा- सेना की इसमें बड़ी भूमिका

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ADHUNIK NEWS ,26 August 2026, (Update 6 October 2026, 9:56 AM UTC)
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पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान के बेटे सुलैमान ईसा खान ने दावा किया है कि पाकिस्तान तानाशाही की तरफ बढ़ रहा है। उन्होंने अपने पिता के लंबे समय से जेल में होने को इसका उदाहरण बताया।

इस्लामाबाद। पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान के बेटे सुलैमान ईसा खान ने दावा किया है कि पाकिस्तान तानाशाही की तरफ बढ़ रहा है। उन्होंने अपने पिता के लंबे समय से जेल में होने को इसका उदाहरण बताया। न्यूज एजेंसी एएनआई के साथ वर्चुअल प्रेस कॉन्फ्रेंस में सुलैमान ने कहा कि पिछले कई साल से उनके पिता के साथ अमानवीय व्यवहार किया जा रहा है और इसमें सेना की बड़ी भूमिका है। प्रेस कॉन्फ्रेंस में इमरान खान की स्वास्थ्य स्थिति को लेकर चर्चा की गई। सुलैमान के साथ उनके भाई कासिम खान, अंतरराष्ट्रीय वकील जेरेड जेनसर और अंतरराष्ट्रीय मामलों तथा मीडिया के सलाहकार सैयद बुखारी भी शामिल हुए। इमरान के बेटे बोले- पिता से नहीं मिल पा रहे:-इमरान के बेटों ने कहा कि वे जेल में बंद अपने पिता से मिलने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन उनकी कोशिशें लगातार नाकाम हो रही हैं। उनका कहना है कि पाकिस्तानी अधिकारियों ने उनके वीजा आवेदन को बार-बार टाला या खारिज किया है।कासिम खान ने कहा, “उन्हें देखने का कोई भी मौका मिले तो हम तुरंत जाना चाहेंगे। हम पाकिस्तान आना चाहते हैं, लेकिन अब हालात और निराशाजनक होते जा रहे हैं। हमारे वीजा आवेदन खारिज किए गए, टाले गए और बार-बार अटकाए गए।” कासिम ने कहा, "मेरे पिता को लगातार एकांत कारावास में रखा जा रहा है। उन्हें 6 बाई 8 फुट की एक ऐसी कोठरी में 23 घंटे तक बंद रखा जाता है, जिसमें न खिड़की है और न ही रोशनी। उनकी उम्र 73 साल है और उनकी एक आंख की 85 फीसदी नजर जा चुकी है। वह आज भी अपने सिद्धांतों पर मजबूती से कायम हैं, लेकिन अब इसकी कीमत उनका शरीर चुका रहा है।" वकील का आरोप- जनरल मुनीर मनमाना शासन चला रहे- इमरान खान के अंतरराष्ट्रीय वकील जेरेड जेनसर ने पाकिस्तान में लोकतंत्र की स्थिति पर गंभीर सवाल उठाए। उन्होंने देश के सैन्य नेतृत्व को इसके लिए जिम्मेदार ठहराया और सेना प्रमुख असीम मुनीर पर ‘ऑथॉरिटेरियनिज्म’ यानी दमनकारी शासन का आरोप लगाया।

जेनसर ने कहा:- "इमरान खान और उनकी पत्नी के खिलाफ जिस तरह कार्रवाई हो रही है, वह किसी लोकतांत्रिक सरकार के तरीके जैसी नहीं है।" उन्होंने दावा किया कि इमरान खान के खिलाफ सैकड़ों मामले मनगढ़ंत आरोपों के आधार पर दर्ज किए गए हैं। यह मामला अब सिर्फ उनकी जेल तक सीमित नहीं है। जेनसर के मुताबिक, उनकी गिरफ्तारी उन लोगों के लिए भी एक चेतावनी है, जो पाकिस्तान में सत्ता को चुनौती देने की कोशिश कर सकते हैं। जेनसर ने आगे कहा:-"उन्हें जेल में रखकर शासन पाकिस्तान के लोगों को साफ संदेश देने की कोशिश कर रहा है कि उन्हें सत्ता के खिलाफ खड़ा होने की कोशिश नहीं करनी चाहिए।" जेनसर ने कहा, “कल्पना कीजिए कि अगर हम इमरान खान के साथ ऐसा कर सकते हैं, जिन्हें पूरी दुनिया जानती है, तो उस व्यक्ति के साथ क्या किया जा सकता है, जिसे दुनिया नहीं जानती?” इमरान खान के इलाज को लेकर भी विवाद- "इमरान खान की सेहत और जेल में उनके इलाज को लेकर भी विवाद बना हुआ है।" 18 अगस्त को पाकिस्तान की सुप्रीम कोर्ट की तीन जजों की पीठ ने अधिकारियों को निर्देश दिया था कि इमरान खान को इलाज के लिए 48 घंटे के भीतर अदियाला जेल से इस्लामाबाद के शिफा इंटरनेशनल अस्पताल ले जाया जाए। अदालत ने यह भी निर्देश दिया था कि इमरान खान की जांच एक स्वतंत्र मेडिकल पैनल करे। इसमें हृदय रोग विशेषज्ञ, आंखों के डॉक्टर, सामान्य चिकित्सक और उनके निजी डॉक्टर डॉ. फैसल सुल्तान को शामिल किया जाना था। हालांकि, 20 अगस्त को अधिकारियों ने इमरान खान को शिफा इंटरनेशनल अस्पताल ले जाने के बजाय पाकिस्तान इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज (पीआईएमएस) पहुंचाया। वहां कई घंटों तक उनकी मेडिकल जांच की गई। इसके बाद उन्हें चिकित्सकीय रूप से फिट घोषित कर वापस अदियाला जेल भेज दिया गया। इमरान खान की टीम का आरोप है कि जेल से शिफा अस्पताल की दिशा में एक ‘डमी काफिला’ भेजा गया, ताकि ऐसा लगे कि इमरान खान को वहां ले जाया जा रहा है। टीम ने यह भी दावा किया कि उनके निजी डॉक्टर डॉ. फैसल सुल्तान शिफा अस्पताल में उनका इंतजार कर रहे थे, लेकिन उन्हें इमरान खान की जांच करने का मौका नहीं दिया गया। इमरान से फिर मिलीं बहन नूरीन नियाजी

इमरान खान की बहन नूरीन नियाजी ने मंगलवार को अदियाला जेल में उनसे मुलाकात की। सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बाद यह लगातार दूसरे हफ्ते है, जब नूरीन ने अपने भाई से मुलाकात की है। सुप्रीम कोर्ट ने 18 अगस्त को आदेश दिया था कि कैदी इमरान खान की उनके परिवार के सदस्यों से सप्ताह में एक बार मुलाकात कराई जाए। अदालत ने यह भी निर्देश दिया था कि सरकार उनके बेटों से सप्ताह में दो बार फोन पर बात कराने की व्यवस्था करे। सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बाद इमरान खान के परिवार ने अदालत को भरोसा दिलाया था कि वे मीडिया से बात नहीं करेंगे। पीटीआई के वकील अवैस यूनुस चौधरी के मुताबिक, मंगलवार को नूरीन नियाजी की इमरान खान से मुलाकात करीब 45 मिनट चली। उन्होंने कहा कि इमरान की दो और बहनें भी जेल के बाहर गाड़ी में इंतजार कर रही थीं। नूरीन नियाजी के जेल से बाहर आने के बाद तीनों बहनें बिना मीडिया से बात किए वहां से चली गईं।

‘द फ्री प्रेस जर्नल’ से बातचीत में मुकेश खन्ना ने शर्मिला टैगोर के इस कथित सुझाव पर अपनी राय रखते हुए कहा, “वह अपनी समझ के हिसाब से बोल रही हैं। मुझे नहीं पता कि उन्होंने ऐसा क्यों कहा। शायद अपनी बात समझाते हुए उनके मुंह से यह निकल गया कि दूसरे धर्मों के लोग इसे समझ या स्वीकार नहीं कर पाएंगे।”

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